बेनीपट्टी में लगातार हो रही बारिश से धौंस नदी के जलस्तर में वृद्धि

रविवार को पानी से लबालब हुई नदी

नेपाल से पानी आने पर बाढ़ आना तय

नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की बढ़ी चिंता

बेनीपट्टी : अनुमंडल के मधवापुर प्रखंड क्षेत्र से होकर बेनीपट्टी के कई इलाके होते हुए दरभंगा तक बहनेवाली अधवारा समूह की सहायक नदी धौंस के जलस्तर में पिछले दिनों से याश तूफान के कारण तेज हवा के साथ हुई भारी बारिश से धौंस नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि हो गयी है. चार दिन पहले तक नदी का जलस्तर महज दो से ढाई मीटर गहरा था. लेकिन रविवार को धौंस नदी पानी से लबालब भर चुका है. बता दें कि बारिश की वजह से शुक्रवार की शाम से नदी के जलस्तर का बढ़ना शुरू हुआ, जो शनिवार की पूरी रात हुई बारिश से निरंतर बढ़ता रहा. हालांकि रविवार की सुबह से बारिश बंद है.

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वहीं नदी के बढ़ते जलस्तर और मूसलाधार बारिश से अनुमंडल प्रक्षेत्र के लोगों में मानसून आगमन से पहले ही बाढ़ आने की सभावना बढ़ने लगी है, जिनसे नदी किनारे के आस-पास में बसे दर्जनों गांवों के लोग सहमे नजर आने लगे हैं. लोगों को अब यह चिंता सताने लगी है कि नेपाल के तराई क्षेत्रों में हुई भारी बारिश की वजह से धौंस नदी का जलस्तर में और इजाफा होना और अन्य नदियों का भी जलस्तर बढ़ना स्वाभाविक है. ऐसे ही भारी बारिश होती रही तो बाढ़ का आना तय है और अब तक जिस तरह की बांधों और तटबंधों की जर्जर स्थिति है उसके अनुसार बाढ़ आयी तो अनुमंडल क्षेत्र में फिर भारी तबाही मच सकती है.

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कई लोगों ने बताया कि बांधों पाली के सरवनमा मोड़ के समीप और करहारा आदि में महज महाराजी बांध की मरम्मति की खानापूरी की गयी है. सोहरौल व इसलामिया टोल समदा सीमा स्थित धौंस नदी के ध्वस्त हुए तटबंध की मरम्मति के नाम पर अब तक महज एक टोकरी मिट्टी भी नही डाली जा सकी है. करहारा सीमा तक केवल कुछ जगहों पर ही मरम्मति की खानापूरी की जा सकी है. बांधों और नदियों के तटबंधों का शेष भाग जैसे के तैसे हैं, जहां रैनकटों और चूहे के सुराग और दरारें खतरे को दावत देती प्रतीत हो रही है. जबकि करहारा व सोहरौल व इस्लामिया टोल सहित कई जगहों पर नदी में जल स्तर बढ़ने पर कटाव भी होने लगता है. कई लोगों ने कहा कि नेपाल से पानी छोड़े जाने पर क्षेत्र में बाढ़ आने की सभांवना से इनकार नही किया जा सकता.

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वैसे भी पिछले चार सालों से अनुमंडल के सभी प्रखंड बाढ़ की विभीषिका का सामना करता रहा है और जान माल की क्षति भी झेलनी पड़ी है. बांधों और नदियों के तटबंधों की जर्जर स्थिति से इस बार भी बाढ़ आने की संभावना को प्रबल बना रहा है. लिहाजा लोग इस बार पहले से ही बाढ़ को लेकर सभी एहतियातन उपाय करने में लग चुके हैं. सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित जोन के लोग रोजमर्रा के सामान भंडारण करने और ऊंचे आश्रय स्थल की तलाश सहित सभी आवश्यक तैयारियों में जुट चुके है. हालांकि इस बाबत एसडीएम अशोक मंडल ने कहा कि नदियों क़े जलस्तर पर नजर रखी जा रही है. बाढ़ से निबटने के लिये प्रशासन सतर्क और सजग है.

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