आजादी के बाद से ही चचरी से आवाजाही करने को विवश है दर्जनों महादलित परिवार

बेनीपट्टी (मधुबनी) : प्रखंड मुख्यालय के संसार चौक के समीप अवस्थित महादलित टोल आजादी के इतने बर्ष बाद भी विकास से कोसों दूर है. जहां के सैंकड़ों लोग एक अदद सड़क के लिये कई दशकों से तरस रहे हैं. एक ओर जहां सरकार महादलित की विकास की बड़ी-बड़ी बातेन कर रही है वहीं दूसरी ओर ये सैंकड़ों महादलित टूटी फूटी चचरी से आवागमन करने को मजबूर हैं. जो सरकार के महादलित विकास के दावे की पोल खोल रही है.

बता दें कि इस टोले में चालीस से भी अधिक महादलित समुदाय के लोग निवास कर रहे हैं लेकिन अपने टोले से मुख्य सड़क तक निकलने या पहुंचने का चचरी ही एक मात्र सहारा है. वह भी बरसात के दिनों में बह जाती है. स्थिति यह है कि गंभीर रुप से बीमार होने या आपात की स्थिति में खाट पर लादकर ही अस्पताल तक पहुंच पाना विवशता बनी रहती है. सड़क निर्माण और समस्या समाधान के लिये टोले के लोग प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक के चक्कर लगा कर थक चुके हैं. लेकिन अब तक नतीजा वही ढ़ाक के तीन पात वाली ही रही है.

लोगों की माने तो कई बार बेनीपट्टी सीओ को लिखित शिकायत देकर रास्ता उपलब्ध कराने की मांग की. लेकिन अब तक किसी ने कोई पहल करना जरुरी नही समझा. जिसके कारण खासकर बरसात के दिनों में इस टोले के लोगों को घर से निकलना मुश्किल हो जाता है. चारों ओर महीनों तक जलजमाव में घिरे रहने और पानी के सड़ांध के बद्बुओं के बीच रहने को मजबूर रहते हैं. इस समस्या के निदान को लेकर कई बार पंचायत के मुखिया से भी गुहार लगायी गयी लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ.

ग्रामीण चंदे पासवान, रामप्रीत पासवान, राम जतन पासवान, परिक्षण पासवान, राम शरण पासवान, युगेश्वर पासवान, गुलाब पासवान, अनिल पासवान, सुनील पासवान, उमेश पासवान, विंदेश्वर पासवान, महेंद्र राम, राम प्रकाश मेहता सहित अन्य लोगो ने बताया कि चुनाव के समय सभी पार्टी के नेता वोट मांगने आते हैं और वादा कर चले जाते हैं. चुनाव संपन्न होते ही जनप्रतिनिधियों को हमारी समस्याओं से कोई सरोकार नही रह जाता है और वे झांकी मारना तक मुनासिब नही समझते.

रोड बनाना तो दूर चुनाव जीतने के बाद पांच साल तक दर्शन भी नही देते हैं. खासकर बरसात के दिनों में बच्चे, बूढ़े, महिला सभी लोग घुटने भर पानी होकर आवाजाही करते हैं. जिसमें विषैले कीड़े मकोड़े के से कब बड़ी दुर्घटना हो जाये कहा नही जा सकता. लोग जान हथेली पर रखकर पार करते हैं. बता दें कि एसएच 52 मुख्य सड़क से टोले में जाने के लिए पूर्व में टोले के दूसरी ओर से एक रास्ता था, जिसे स्थानीय लोगों के द्वारा अतिक्रमण कर बंद कर दिया गया है. इस बाबत बीडीओ मनोज कुमार ने कहा जानकारी प्राप्त कर रहे हैं. समस्या के समाधान के लिये जल्दी ही पहल किया जायेगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!