उच्चैठ छिन्नमस्तिका मंदिर में सादगी से मनाया जायेगा शारदीय नवरात्र पूजनोत्सव, तैयारी पूरी

  • कोविड-19 को लेकर पहली बार उच्चैठ छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर में नही लगा मेला
  • सब की मुरादें पुरी करतीं हैं उच्चैठवासिनी मां छिन्नमस्तिका
फोटो:- बेनीपट्टी के उच्चैठ स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर

बेनीपट्टी (मधुबनी): प्रखंड मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर उच्चैठ स्थित पश्चिम उतर कोने पर अवस्थित मां छिन्नमस्तिका मंदीर अवस्थित है, जहां संस्कृत के महाकवि कालिदास को विद्वता का वरदान मिला था. कालिदास महामूर्ख माने जाने के कारण पत्नी पद्मावती से प्रताडि़त होकर यहां शरण लिये थे और उनके भक्तिभाव का परिणाम था कि मां साक्षात दर्शन देकर उनको शापमुक्त कीं थीं और महामूर्ख कालिया दुनियां में महाकवि कालिदास के नाम से विख्यात हुए थे.

फोटो:- बेनीपट्टी के उच्चैठ स्थित मां छिन्नमस्तिका

मंदिर परिसर से कुछ ही दूरी पर आज भी कालीदास डीह जीवंत है, जहां नवरात्रा में तंत्र साधक अपनी साधना पूर्ण करते हैं. डीह स्थल से 5 सौ मीटर उत्तर दिशा की ओर मां छिन्नमस्तिका भगवती का अति प्राचीन मंदीर अवस्थित है. जिसे उच्चैठ भगवती के नाम से भी जाना जाता है और इसी मंदीर में मूर्ख कालिया को मां छिन्नमस्तिका से महाकवि कालिदास बनने का वरदान मिला था.

पौराणिक तत्थों के अनुसार इसी देवी को प्रसन्न कर वर स्वरुप ज्ञान प्राप्त किया था और महामूर्ख कालिया से महाकवि कालीदास में विख्यात हुए थे. बताते चलें कि ढाई फीट विग्रह वाली इस देवी दुर्गा की प्रतिमा विखंडित है. प्रतिमा के दक्षिण भाग में ब्रहां की मूर्ति व बायें भाग में मतस्य की आकृति उकेड़ी हुई प्रतीत होती है. भगवती की मूर्ति की निर्माण कला संभवतः गुप्त कालीन प्रतीत होती है. धर्मपरायणों के अनुसार उक्त मंदिर में श्री राम, लक्ष्मण, विष्वामित्र सहित कई महान संत भगवती के दर्शन करने आये थें.

फोटो:- उच्चैठ छिन्नमस्तिका मंदिर में कालिदास का हाथ पकड़े हुए माँ भगवती

जनश्रुति के अनुसार यह 51 श्क्तिपीठों में से एक है. कहा जाता है कि राजा दक्ष के यज्ञ में आहुत हवन कुंड में कूदकर मां गौड़ी ने अपने शरीर को भष्म कर लिया था और भगवान शिव के तांडव नृत्य के दौरान उनके प्रकोप से बचाने के लिये मां के शव को भगवान विष्णु ने अपने त्रिशूल से 51 भागों में विभक्त कर दिया था. इसी क्रम में मां का मस्तिस्क कट कर यहां गिरा था. नवरात्र के अलावे अन्य दिनों में भी भारत के कई राज्यों व परोसी देश नेपाल भी श्रद्धालु आकर मां की पूजा अर्चना करते हैं.

बताया जाता है कि उच्चैठ भगवती के दर से आज तक कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटा है. भगवती सब की मुरादें पुरी कर देती है. जिससे लोगों की आस्था परवान चढ़ती रही है. हमेशा पूरा उच्चैठ क्षेत्र सर्व मंगल मांग्लये शिवे सर्वाथ साधिके, शरण्ये त्रयंबिके नारायणि नमोस्तुते की ध्वनि और जय माता दी के नारों से गुंजायमान बना रहता है. शारदीय नवरात्र पूजनोत्सव कल शनिवार से प्रारंभ हो रहा है और 26 अक्टूबर को संपन्न होगा. पूजनोत्सव समारोह की सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी है. सप्तमी तिथि से यहां अप्रत्याशित भीड़ जुटती है.

हालांकि इस बार कोविड 19 महामारी के मद्देनजर रखते हुए जिला प्रशासन के दिशा निर्देश के आलोक में पहली बार ऐसा हो रहा है कि मंदिर परिसर में मेला का आयोजन नही किया गया है. सादगी के साथ कोविड-19 और चुनाव आचार संहिता के लिये जारी प्रोटोकॉल का पालन करने हुए पूजनोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. शांतिपूर्ण तरीके से जारी दिशा निर्देशानुसार पूजनोत्सव संपन्न कराये जाने हेतु प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है.

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