महिनाथपुर गांव में सात दिन में हुई सात मौते

गांव की चिकित्सा व्यवस्था भगवान भरोसे।

भय व दहशत में रहकर जी रहे है लोग

रौशन कुमार की रिपोर्ट
बासोपट्टी : कोरोना वायरस के दूसरे लहर के प्रकोप से पूरा देश त्राहि माम कर रहा है लाखों लोगों की मौत हो चुकी है। करोडों लोग संक्रमित हैं। ऑक्सीजन और दवा के बिना लोगों की मौत भारतीय चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोल रही है । ऐसे में मूलतः चिन्ता का विषय है कि बिहार के गाँवो में कोरोना का फैलाव अब कोरोना धीरे-धीरे गाँवों में अपना पाँव पसार रहा है। मधुबनी जिला के बासोपट्टी प्रखंड के महिनाथपुर गाँव में पिछ्ले सात दिनों में सात लोगों की मौत हो चुकी है। मृतक में 34 साल की एक महिला भी शामिल है। अन्य मृतक 60 वर्ष से अधिक उम्र के बताये गए है। सभी मृतकों में एक समान्य लक्षण रहा सर्दी बुखार व खाँसी से होने की दी जा रही है। इस गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र है। लेकिन एक भी चिकित्सक व स्वस्थ्यकर्मी नही रहते है।

ग्रामीण भय व दहशत के माहौल में सब भगवान भरोसे है। गाँव के लोगों की मानें तो गांव में जांच नही होने के कारण लोगों को शुरुआत में खुद के संक्रमित होने का पता नही चलता और फिर स्वास्थ्य व्यवस्था के अभाव में लोग की मृत्यु हो रही है। लोग डरे हुए हैं। वह भयभीत होकर घरों में रहने को मजबूर हैं। ग्रामीण नवीन तिवारी ने कहा कि लोग व्यवस्था के अभाव में अधिक मर रहे हैं। गांव में कोई जांच व ईलाज की व्यवस्था नही है। गांव में कहने के लिए एक स्वास्थ्य उपकेंद्र तो है। लेकिन उसके भवन में भूंसा रखा हुआ है। इस उपकेंद्र का ताला कभी नही खुलता है। सरकार द्वारा घोषणा की गई प्रति परिवार मास्क का वितरण भी नही किया गया है। परमेश्वर चौधरी ने बताया कि लगातार हो रहे मौत से गांव में भय का माहौल है। दहशत से लोग मृतक के संस्कार में भी नही जा रहे है। किसी तरह से मृतक का संस्कार हो रहा है। चुकी मृतक की कोविड जांच नही किया हुआ रहता है। इसलिए डर व भय से संस्कार में भी जाना छोड़ दिया है। मो भोला ने बताया कि महिनाथपुर गाव नौ वार्ड का है। करीब साढ़े चार हजार वोटर व 10 हजार से ऊपर आबादी वाले गांव के लोग कोरोना काल मे भगवान भरोसे जीने को मजबूर है। लेकिन मास्क कौन कहे।

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सेनिटाइज भी नही किया गया है। अशोक चौधरी ने बताया कि सैकड़ो लोग इस समय सर्दी खासी झुकाम व सांस फूलने के तकलीफ से गुजर रहे है। इस लक्षण से आक्रांत लोग जांच नही होने से बिना जांच कराए ग्रामीण चिकित्सक से उपचार कराने को मजबूर है। बैद्यनाथ भगत सहित कई अन्य ने बताया कि गांव में सरकार द्वारा अभी तक किसी प्रकार की कोई कोरोना जांच का शिविर नही लगाया है। कुछ लोग संक्रमित होने पर सीएचसी बासोपट्टी जाकर जांच कराए है। गांव में कई लोग संक्रमित होकर होम आइसोलेशन में है।

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कोरोना जांच कराने 15 किलोमीटर जाना पड़ता है दूर

महिनाथपुर गांव बासोपट्टी प्रखंड के इंडो-नेपाल बॉर्डर पर बसा हुआ है। यह गांव आधा नेपाल व आधा इंडिया में है। खुला बॉर्डर रहने के बाद भी एसएसबी के चौकसी के बाद बॉर्डर पर लोगो का आना जाना लगा रहता है। यंहा से बासोपट्टी सीएचसी करीब 15 किलोमीटर दूर है। जिससे गांव के लोग कोरोना जांच कराने जाने में हिचकते है। पंचायत के मुखिया श्रवण ठाकुर ने बताया कि गांव के उपकेंद्र हमेशा बंद रहता है। गांव में कोरोना जांच शिविर लगाने की आवश्यकता है। उन्होंने गांव में वैक्सीन लगाने की शिविर भी आयोजित करने की मांग डीएम से की है। ताकि समय रहते लोगो को जान बचाया जा सके। वैक्सीन शिविर कुछ दिन अडिशनल पीएचसी छतौनी में लगाया गया। जंहा कुछ लोगो ने जाकर वैक्सीन लगाया। लेकिन वँहा भी वैक्सीन लगाने का कार्य बंद कर दिया गया। उन्होंने बताया कि एक ब्लैक फंगस के लक्षण वाले मरीज भी इसी पंचायत के दुहवीबजार में है। इससे लोगो मे और डर भय व दहशत का माहौल लोगो मे देखा जा रहा है। गांव में लोग लॉक डाउन का उलंघन भी कर रहे है। जिससे वायरस तेजी से फैल रहा है। घनी आबादी रहने के कारण वायरस लोगो ज्यादा फैल रहा है। इसे अविलंब रोकने की आवश्यकता है। 

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