अरेर नगवास सड़क में बिचखाना गांव के समीप पुलिया धंसी

  • आवागमन में राहगीरों को झेलनी पड़ रही है परेशानी
  • सरकार और प्रशासन के खिलाफ लोगों में गहराया आक्रोश
फोटो:- बेनीपट्टी के बिचखाना चौक पर विरोध व्यक्त करते ग्रामीण और धंसी पुलिया

बेनीपट्टी: प्रखंड के अरेर से नगवास गांव जानेवाली मुख्य सड़क में बिचखाना गांव के बजरंगबली मंदिर के समीप बनी पुलिया भारी ओवर लोडेड वाहनों के परिचालन से धंस गयी. जहां लोग अपनी जान संकट में डालकर उक्त धंसे पुलिये से आवाजाही करने को विवश हैं. सड़क की जर्जरता और पुलिये के धंसने के कारण उक्त स्थल पर आये दिन लोग दुर्घटनाओं का शिकार होते रहे हैं.

ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2012 में नावार्ड योजना मद से करीब 9.2 किलोमीटर की दूरी में करोडों रुपये की लागत से अरेर से नगवास गांव को परस्पर जोड़ने के उद्देश्य से इस सड़क का निर्माण कराया गया था, जिसमें कई जगहों पर पुलिया का भी निर्माण कराया जाना आवश्यक था. लेकिन पर्याप्त संख्या में पुलिया का निर्माण नही कराया गया और तकरीबन दो दशक पुराने पुलिया से जोड़ते हुए सड़क निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया. सड़क बनते ही भारी और ओवरलोडेड वाहनों का परिचालन भी होने लगा.

पुलिया जर्जर होने के कारण भारी दबाब नही झेल सकी और पूरी तरह धंस गयी. लिहाजा एक बार फिर से वहां चार चक्का वाहनों का आवागमन भी ठप हो गया है. जबकि निर्माण के चार साल बाद ही सड़क की भी स्थिति इतनी जर्जर हो गयी थी कि वर्ष 2016 में इसे एमआर योजना मद से लाखों रुपये दोबारा खर्च कर मरम्मत करायी गयी लेकिन इस बार भी वहां नये सिरे से पुलिया का निर्माण नही कराया जा सका. एक दो जगहों पर वर्ष 2012 में पुलिया बनाया भी गया, जो इन दिनों जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है.

ग्रामीण राघव पांडेय, संतोष पांडेय, रमेश पांडेय, शंकर ठाकुर, मदन पांडेय, चंदेश्वर पांडेय, रामनारायण साह, राम शंकर चौधरी, धनेश्वर पांडेय, राजेश ठाकुर, पुलर ठाकुर, मुन्ना पांडेय, मुकेश नायक, विकास झा, लाल महतो, जलेश्वर राम, सरोज पांडेय, बालदेव ठाकुर, दीपक घटवार व जननू लाल सहित अन्य लोगों ने बताया कि पुलिया पूरी तरह धंस जाने की वजह से कई महीनों तक आस-पास के दर्जनों गांवों के लोगों का चार चक्के के साथ आवाजाही करना ठप रहा तो ग्रामीणों ने धंसे भाग पर कूड़ा कछड़ा आदि डाल दिया ताकि लोग दुर्घटना से बच सके.

अब भी यह धंसी पुलिया दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रही है. जिसमें घने रात में अक्सर वाहन चालक इसका शिकार हो चुके हैं. लेकिन अब तक इसकी मरम्मति के दिशा में न तो संबंधित अधिकारी न ही कोई प्रतिनिधियों ने ही सुध लेने की जहमत उठायी है.

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में गांव में किसी गंभीर रुप से बीमार होने पर उसे बाहर के अस्पतालों तक ले जाना मुश्किल होता है. आपात की स्थिति में बड़े वाहन की तो बात दूर एम्बुलेंस भी गांव तक नही पहुंच सकता है. इस बाबत एसडीएम अशोक मंडल ने कहा कि जानकारी मिली है. चुनाव के बाद संबंधित विभाग को इस समस्या से अवगत करा जल्द ही समस्या का निदान करने का प्रयास किया जायेगा.

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