मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) को लेकर मधुबनी डीईओ व डीपीओ को शोकॉज से खलबली

मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) के अनाज का लाभ बच्चों को नहीं दिये जाने से नाराज विभाग द्वारा डीइओ नसीम अहमद और डीपीओ मो. इम्तियाज को शोकॉज किये जाने के बाद जिले में खलबली मची है। शिक्षा विभाग का हर लोग हर हाल में शीघ्र बच्चों को अनाज उपलब्ध कराने में जुट गया है। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर कवायद की गयी। ताकि वितरण की गति तेज हो सके।

हालांकि विभाग की मंथर गति का आलम यह है कि स्कूलों में अब तक मई से जुलाई तक का चावल ही नहीं पहुंचा है। जिले में लगभग पांच लाख बच्चे को एमडीएम का अनाज नहीं मिला है। इन बच्चों के अभिभावकों को चावल देना है।

एमडीएम के अन्य मदों की राशि ऑनलाइन बच्चों के खाता में राज्य से ही भेजी जा रही है। लेकिन चावल नहीं दिये जाने का मामला तुल पकड़ लिया है। राज्य स्तरीय समीक्षा में जिले में केवल दो प्रतिशत बच्चों को चावल दिये जाने से विभाग तल्ख हुआ है। जिले के अधिकारियों को चेताया गया है। इनके द्वारा शोकॉज के उत्तर संतोषजनक नहीं पाये जाने पर इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय माना जा रहा है। अपर मुख्य सचिव आरके महाजन ने सभी को शोकॉज किया है।

मई से जुलाई तक का देना है अनाज :

प्रारंभिक स्कूल के नामांकित बच्चे को तीन मई से 31 जुलाई तक का अनाज देना है। लेकिन जिले में स्कूल में पहले से रखे अनाज को बंटवारा करने की कोशिश की गयी। लेकिन अधिकतर स्कूलों में चावल खराब हो चुका है। मुख्यालय में इसकी शिकायत होने के बाद खराब चावल वितरण पर रोक लगायी गयी। इसके बाद विभाग ने उठाव और वितरण की प्रक्रिया को शुरू किया। और अभी यह फाइल दफ्तरों में ही भटक रहा है। लिहाजा स्कूलों में अनाज नहीं पहुंच सका है। जो जिले के लिए किरकिरी का कारण बना है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत विद्यालय के बच्चों को अनाज नहीं मिलने से राज्य मुख्यालय की भी किरकिरी हो चुकी है।

तेजी लाने की चल रही कार्रवाई :

मुख्यालय से कार्रवाई की आशंका को देखते हुए जिले में शीघ्र आवंटन और वितरण की प्रक्रिया को तेज किये जाने का दावा किया जा रहा है। एमडीएम डीपीओ मो. इम्तियाज ने बताया कि रिपोर्ट भेजे जाने के दिन दो प्रतिशत वितरण था जो आज बढ़कर पांच प्रतिशत हो गया है। शीघ्र ही छात्रों को अनाज का वितरण कर दिया जायेगा।

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