5 सौ मीटर निर्माण कार्य को छोड़ संवेदक बोरिया बिस्तर समेट हुआ फरार, लोगों में नाराजगी

अवधि बीतने के बाद भी बाजितपुर से सिरवारा जानेवाली सड़क का नही पूरा हुआ निर्माण कार्य

बेनीपट्टी : प्रखंड के सीतामढ़ी जिले की सीमा के पास अवस्थित बर्री पंचायत में वाजितपुर से सिरवारा जानेवाली ग्रामीण सड़क का निर्माण कार्य समय सीमा बीतने के बाद ही पूरा नही किया जा सका है. जिससे बाढ़ और बरसात के दिनों में स्थानीय लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. सीतामढ़ी जिले की सीमा से सटे इस इलाके के लोगों को सीतामढ़ी की ओर से आनेवाली बाढ़ भी हर वर्ष भयंकर तबाही मचाती है और निचले इलाके में बसे होने के कारण बाढ़ और बरसात के दिनों में यहां के लोग त्राहिमाम करते रहे हैं.

बेनीपट्टी के बर्री पंचायत में अधूरी पड़ी वाजितपुर सिरवारा सड़क निर्माण

बता दें कि जीटीएसएनवाई योजना के तहत वाजितपुर पासवान टोला से विंदेश्वर पासवान ( सिरवारा) के घर तक 1 करोड़ 12 लाख 26 हजार 293 रुपये की प्राक्कलित राशि की लागत से 18 सौ मीटर की दूरी में सीमेंट कांक्रीट सड़क का निर्माण कराया जाना था. जिसमें होम पाइप युक्त चार पुलिये का भी निर्माण कराया जाना था. प्राक्कलन बोर्ड पर निर्माण आरंभ करने की तिथि 16 मई 2018 और निर्माण पूरा करने की तिथि 15 अप्रैल 2019 अंकित है. निर्माण कार्य हेतु ग्रामीण कार्य विभाग के बेनीपट्टी कार्य प्रमंडल को कार्यकारी एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी गयी है और दरभंगा के रामकुमार मिश्रा को संवेदक बनाया गया. पूरे 2019 बीतने के बाद भी सड़क निर्माण नही हुई तो ग्रामीणों ने इसकी शिकायत विभागीय अधिकारियों से की तो संवेदक ने वर्ष 2020 के अंतिम माह में आनन फानन में सड़क निर्माण शुरू की और निर्धारित दूरी में तकरीबन 5 सौ मीटर में बिना कार्य किये बोरिया बिस्तर समेत संवेदक फरार हो गये. जिससे तय किये गये चार पुलिये का भी निर्माण नही कराये जा सके. विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत कर संवेदक ने प्राक्कलित राशि का एमबी बुक करा राशि का भुगतान प्राप्त कर लिया और अधूरे निर्माण कार्य को जैसे का तैसे छोड़ दिया.

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पप्पू यादव, विक्रम कुमार व हरखित पासवान सहित कई ग्रामीणों ने कहा कि काफी दिनों तक मोबाइल से संवेदक और अधिकारियों से शेष बचे भाग को पूरा कराने की आरजू बिनती की जाती थी तो जल्दी ही निर्माण कार्य पूरा होने की बात कहकर लोगों को आश्वस्त करा दिया जाता था. लेकिन पिछले माह संवेदक ने फोन पर रोड फाइनल हो जाने की बात कहकर फोन काट दिया. उसके बाद न तो अधिकारी न ही संवेदक किसी ग्रामीणों का कॉल रिसीव करना उचित समझते हैं. जबकि सड़क निर्माण से पांच वर्षों तक सड़क का अनुरक्षण भी किया जाना है. ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सड़क निर्माण में घटिया सामाग्री का इस्तेमाल किया गया है. सड़क पर न तो कभी रोलर चलाया गया न ही निर्धारित मानक की चौड़ाई और ऊंचाई बनायी गयी. जिससे निर्माण के साथ ही कई जगहों पर सड़क टूटने भी लगी है. मनमाने तरीके से सड़क निर्माण कर करोड़ो के वारे न्यारे कर दिये गये. अब स्थिति यह है कि बाढ़ बारिश में घुटने भर कीचड़ और जलजमाव होने के कारण आवागमन ठप होकर रह जाता है.

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ग्रामीणों का आक्रोश इस बात को लेकर है कि शेष बचे भाग को योजना में लिये जाने के कारण ग्राम पंचायत स्तर से भी बिना एनओसी लिये सड़क का निर्माण कराया जा सकता. इस बाबत पूछे जाने पर ग्रामीण कार्य विभाग के बेनीपट्टी कार्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता अशोक कुमार ने कहा कि मामले की जांच की जायेगी.

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