मैथिली भाषा को प्राथमिक शिक्षा में शामिल करें

मधुबनी: मैथिली भाषा को प्राथमिक शिक्षा में शामिल करने की मुहिम तेज कर दी गई है। मिथिला मैथिली से जुड़े कई लोगों ने मैथिली शिक्षा संघर्ष मोर्चा का गठन कर इस अभियान को गति दी है। संघर्ष मोर्चा के सदस्यों ने सभी पंचायत के मुखिया से ग्राम सभा में मैथिली भाषा को प्राथमिक शिक्षा में शामिल करने का प्रस्ताव लेकर सरकार को भेजने की अनुरोध किया है।

अनुरोध करने वालों में सहित्यांगन के संस्थापक मलय नाथ मंडन, संघर्ष मोर्चा के संयोजक अशोक कुमार सिंह, सह संयोजक नरेंद्र ठाकुर ने संयुक्त रूप से कहा कि मैथिली भारत के संविधान की अष्टम सूची में विगत 16 साल पहले शामिल किया गया।

मैथिली की इतिहास पर नजर डालें तो बौद्ध काल 600 ईशा में मैथिली इतिहास की दखल हो चुकी थी। करीब 1200 ईशा की मैथिली साहित्य आज उपलब्ध है। मैथिली में डेढ़ सौ वर्ष पूर्व के व्याकरण शब्दकोश आदि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। इसकी प्राचीन काल की लिपि मिथिलाक्षर प्रचलन में है। जो इस भाषा के प्राचीनता की पुष्टि करती है।

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