सिद्धपीठ उच्चैठ मंदीर के मेला परिसर व धर्मशाला में चार से पांच फुट जलजमाव

  • 22 एकड़ जमीन होने के बावजूद अधिकांश भूभाग अतिक्रमित
  • शारदीय नवरात्र पूजनोत्सव निकट होने पर भी नही दिख रही है साफ-सफाई की तैयारी
फोटो:- बेनीपट्टी के उच्चैठ छिन्नमस्तिका मंदीर के मेला परिसर व धर्मशाला में घुटने भर से अधिक जलजमाव

बेनीपट्टी (मधुबनी): प्रखंड मुख्यालय से पांच किमी पश्चिम उच्चैठ स्थित सिद्धपीठ उच्चैठ छिन्मस्तिका मंदीर के गर्भगृह का रंगरोगण कर शारदीय नवरात्र पूजनोत्सव की तैयारी शुरु की जा चुकी है. पूजनोत्सव को सफल बनाये जाने को लेकर अधिकारियों की तैयारी बैठक कब होगी यह अभी तय नही हो पाया है. वहीं दूसरी ओर मेला परिसर में बना कई दशक पुराना धर्मशाला और मेला परिसर में महीनों से चार से पांच फुट जलजमाव और कचरों का अंबार लगा है.

जलजमाव के सड़ांध की बदबू से संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका व्याप्त है. मेला परिसर में महज एक मात्र शौचालय दुरुस्त है. शारदीय नवरात्र शुरु होने में महज अब चंद दिन ही शेष रह गये हैं और नवरात्र के दौरान पड़ोसी देश नेपाल व भारत के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं की हजारों की भारी भीड़ उमड़ती रही है. ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

इसी बीच बिहार विधानसभा का चुनाव भी होना है, जिसमें आदर्श आचार संहिता और कोरोना महामारी को देखते हुए शारदीय नवरात्र पूजनोत्सव को किस तरह संपन्न कराया जायेगा, अब तक इसके लिये जिला प्रशासन के द्वारा कोई खास दिशा निर्देश नही जारी किया गया है. लेकिन विशेष एहतियातन उपाय के साथ ही इस बार मेला लगाये जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है. मसलन साफ सफाई, सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का प्रयोग के साथ भीड़ नियंत्रण पर प्रशासन को कुछ खास मशक्कत करनी पड़ सकती है.

उधर कूड़े कचरे का ढ़ेर और जलजमाव को देखकर मेला कहां और किस तरह लगेगा यह अभी से ही स्थानीय लोगों को चिंता सताने लगी है. इतनी बड़ी संख्या में आनेवाले श्रद्धालु और दुकानदार कहां ठहर सकेंगे. महिला श्रद्धालुओं के लिये शौचालय की समस्या बन सकती है. हर साल मेला का लाखों रुपये का टेंडर होता आया है. अधिकारी लाखों रुपये वसूल कर चले जाते हैं पर मेला परिसर की साफ सफाई, जलनिकासी और जीर्ण शीर्ण धर्मशाला की मरम्मति के दिशा में कोई पहल करना भी मुनासिब नही समझते.

बता दें कि मंदीर के पास तकरीबन 22 एकड़ जमीन है पर चारों ओर से अतिक्रमण होने के कारण मंदीर परिसर दिनोदिन संकीर्ण होता जा रहा है. अतिक्रमण मुक्ति के लिये पूर्व के डीएम सहित कई अधिकारी प्रयास कर थक चुके हैं. अब भी अतिक्रमण का सिलसिला जारी है. वहीं मिथिला का सर्वाधिक प्रसिद्ध शक्तिपीठ होने व पर्यटन स्थल में शुमार किये जाने के बावजूद मंदीर का अपेक्षित विकास नही हो सका है, जो मिथिला वासियों को सालता रहा है.

गौरतलब हो कि बीते वर्षों में सुलभ शौचालय के संस्थापक बिंदेश्वरी पाठक के द्वारा भी 25 लाख रुपये की लागत से सार्वजनिक शौचालय बनवाने और बेनीपट्टी विधायक के द्वारा भी सार्वजनिक शौचालय निर्माण कराये जाने की घोषणा भी डपोरशंखी ही साबित हुई है. हाथीगेट के पास मुख्य सड़क पर लगा जलजमाव राहगीरों की फझिहत बढ़ा रही है तो हाथीगेट से मंदीर परिसर तक जानेवाली सड़क बेहद जर्जरता का शिकार हो चुकी है. इन सभी समस्याओं के निदान किये बिना शारदीय नवरात्र पूजनोत्सव का सफलतापूर्वक आयोजन कराना किसी चुनौती से कमतर नही होगा.

इस बाबत पूछे जाने पर एसडीएम अशोक मंडल ने कहा कि कोरोना महामारी और आचार संहिता को देखते हुए जिला प्रशासन के द्वारा जैसा निर्देश जारी होगा, उसके अनुसार व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी. समस्याओं का निदान कर लिया जायेगा.

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