रोजगार सृजन में केंद्र व राज्य सरकार पूरी तरफ से विफल : राजद नेता राजीव कुमार यादव

सत्यनारायण यादव कि रिपोर्ट

बिस्फी (मधुबनी): युवा राजद नेता राजीव कुमार यादव ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के चलते बिहार के छात्र, मजदूर या प्राइवेट प्रोफेशनल अपने गांव की ओर आ रहे हैं। बिहार कृषि प्रधान राज्य होने के चलते बिहार बटवारा होने के बाद दो खंडों में बांटा। बिहार और झारखंड, जिसमे प्राकृतिक संपदा झारखंड में है और बंटवारा के समय में सर्वे के अनुसार सिर्फ व सिर्फ बिहार में बालू और पानी बचा हुआ है। बिहार की मिट्टी भी बहुत उपजाऊ है।

हर खेत में प्रतिवर्ष 2 से 3 तरह की फसल उगाई जा सकती है लेक़िन सुखाड़ और बाढ़ के चलते खेती करना बहुत ही कठिन हो जाता है। जिसके चलते यहां के लोग अन्य राज्य देश ,विदेश में पलायन कर रहे हैं। जो कि बिहार के लिए जटिल समस्या है। गांव में तकनीकी विचार और चेतना वाले अपना गांव की हवा,मिट्टी को छोड़कर दूसरे प्रदेशों में अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए चले जाते हैं। जिस समय में वो जाते है उस समय मे आर्थिक शैक्षणिक, सामाजिक,परिवारिक दबाब रहता है।

लेकिन वहां जाने के बाद अपना पूरा शक्ति वहां स्थापित करने में लगाते है।कभी कुदरत की मार तो कभी बिहारी कह कर उनको अपमानित किया जाता है तो कभी किस्मत को मानकर अपना काम करते हैं। लेकिन अभी का जो स्थिति है कोरोना वायरस हर उस परिवार को अपना पेट भरने औऱ अपने परिवार को पेट भरने के लिए अपने कमाता था। आज सब असमर्थ हो चुके है।ये लोग क्या करे अब उनको अपने स्थिति और परिस्थिति में अपने गांव की याद आ रहा है। वो लौटते ही अपनी जमीन को अपने खेत को फिर से खेती और अपना बिजनेस जो कि मजबूर होकर अपना गांव में करना चाह रहे हैं।लॉक डाउन के दौरान अपने गांव में आया तो देखा जो लड़का ने प्रदेश में काम करके घर लौटता था वह अपने घर पर व्यवस्थित रूप से रहता था।

हम सरकार से कहना चाहते हैं कि आप अपने राज्य में छोटा और बड़ा उद्योग कल-कारखाने और बिहार के जो युवा बेरोजगार व्यक्ति है। उसे उचित तकनीक के माध्यम से प्रशिक्षित करके उसे रोजगार दिया जाए। आज के इस दौर में हमारे के समाज में कुछ जाति है।जैसे घनकार, सदा, लोहार, कुम्हार, राम, ततमा, बिन, पासी औऱ मिथिला पेंटिंग जो इनके हाथों का कला है।इसमें सरकार उसे आर्थिक मदद कर छोटे-छोटे उद्योग का दर्जा दिया जाए।इसमे सरकार को एवं उस व्यक्ति को दो तरह से मुनाफा है। पहला ये लोग अपनी कला का प्रदर्शन करेगा।दूसरा बिहार से अन्य राज्य के लिए पलायन नही करेगा। अपने परिवार के साथ पुनः नया जीवनयापन करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में आज की तारीख में जो ग्लोबल शिक्षा हो गया है।उसे बिहार के सरकारी स्कूल से जोड़ा जाएं। उस पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाए। ताकि बिहार के युवा, छात्र जो अन्य राज्य में अपना तकनीकी डिग्री प्राप्त करने जाते हैं। हमारे हिसाब से उससे अपने राज्यो का वार्षिक हानी होती है। जो कि राज्य के लिए नुकसानदेह है। इसके लिए हर डिपार्टमेंट से कॉलेजो की समुचित व्यवस्था किया जाय। उच्च शिक्षा का भी व्यवस्था की जाय। किसानों की खेती को बढ़ावा देने के लिए
90 फिशदी बोर्डिंग दमकल पर सब्सिडी दी जाय, फ्री बिजली मोटर दी जाए। ट्रैक्टर, धान गेहूं काटने वाला मशीन, धान रोपने वाला मशीन, उर्वरक औऱ कीटनाशक पर सब्सिडी दी जाए। जिसे उपलब्ध कराने में सरकार विफल है।

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