BIHAR : अप्रैल-मई में होंगे पंचायत चुनाव, नीतीश सरकार ने लिया है ये बड़ा फैसला

मधुबनी(DESK) : बिहार की नीतीश कुमार की कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है जिसके मुताबिक राज्य की पंचायतों में आरक्षण के प्रावधानों में 2026 तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. राज्य में अप्रैल-मई के महीने में पंचायत के चुनाव होनेवाले हैं. ऐसे में जिस पंचायत में जैसा आरक्षण का प्रावधान लागू किया गया है, उसे यथावत रहने दिया गया है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट की हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया. बैठक में कुल 42 एजेंडों पर सहमति दी गयी. राज्य में नये नगर निकायों के गठन के बाद पंचायतों में आरक्षण प्रभावित होने की आशंका थी. नये नगर निकायों के गठन के बाद करीब 300 पंचायतों का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा, जबकि 200 पंचायतों का पुनर्गठन करने की आ‌वश्यकता होगी.

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अप्रैल-मई में होने वाले पंचायत चुनाव में कैबिनेट के इस निर्णय से आरक्षण का प्रावधान पूरी तरह से अछूता रह जायेगा. जहां पर जिस वर्ग के लिए आरक्षित सीट है, उस सीट के आरक्षण में अब कोई बदलाव नहीं होगा.

कैबिनेट के इस फैसले से राज्य की करीब आठ हजार पंचायतों में मुखिया के पद, ग्राम कचहरियों में सरपंच के पद, करीब एक लाख 14 हजार वार्डों में वार्ड सदस्यों के पद, ग्राम कचहरियों के एक लाख 14 हजार पंचों के पद, पंचायत समिति के कुल 11497 पद और जिला पर्षद के 116 पदों के आरक्षण में कोई बदलाव नहीं होगा.

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बिहार में प्रमंडलवार पंचायत चुनाव के तहत एक जिले की सभी पंचायतों में एक ही दिन में चुनाव संपन्न होगा. एक जिले में किसी भी स्थिति में चुनाव के लिए दो तिथि निर्धारित नहीं होगी. राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव योगेंद्र राम ने सोमवार को बताया कि तीन-चार प्रमंडल के तीन-चार जिलों में एक ही साथ चुनाव कराए जा सकते हैं. बूथों की संख्या और जिलों के लिए ईवीएम की उपलब्धता के आधार पर इसका निर्धारण किया जाएगा. छोटे जिलों को बड़े जिलों के साथ जोड़कर भी चुनाव कराने कराए जा सकेंगे.

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