प्राथमिक विद्यालय नकटा जिरौल में चावल वितरण में अनियमितता को लेकर ग्रामीणों ने किया हंगामा

शिक्षकों और ग्रामीणों में कुछ देर के लिये गाली गलौज और हाथापाई की नौबत

बंद कराया वितरण और शिक्षकों पर चावल गबन करने का लगाये आरोप

ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की मांग की

हरलाखी : प्रखंड के जिरौल नकटा टोल स्थित प्राथमिक विद्यालय में चावल वितरण में अनियमितता से नाराज ग्रामीणों ने शुक्रवार को जमकर हो हंगामा किया। देखते ही देखते हंगामा इतना बढ़ गया कि शिक्षकों और ग्रामीणों में गाली गलौज और हाथापाई की भी नौबत आ गयी। जिसे कुछ स्थानीय प्रबुद्धजनों की पहल से रोका जा सका।

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दर्जनों की संख्या में मौजूद ग्रामीणों का आरोप था कि वर्ष 2020 के अप्रैल से अब तक महज तीन बार ही बच्चों के बीच चावल वितरण किया गया है, वह भी शतप्रतिशत बच्चों के बीच नही। हर बार कुछ बच्चों के बीच चावल वितरण कर खानापूरी की जा रही है और शेष चावल विद्यालय के शिक्षकों व अधिकारियों की मिलीभगत से गबन किया जा रहा है।

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दरअसल शुक्रवार को बच्चों के बीच अक्टूबर नवंबर माह का चावल वितरण शुरू हुआ और अभी 27 बच्चों के बीच ही 4 किलो प्रति बच्चे के हिसाब से चावल का वितरण हो पाया था कि बड़ी संख्या में ग्रामीण आकर विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे और वितरण को रोकवा दिया। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक सभी बच्चों के बीच वितरण नही होगा और बीते वर्ष के बकाए चावल का आवंटन और वितरण नही होगा तब तक वितरण रोका जाये। इसके साथ ही अप्रैल से अब तक चावल आवंटन की जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाये नही तो विद्यालय में तालेबंदी की जायेगी।

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ग्रामीणों ने यह भी कहा कि शिक्षकों को विद्यालय आने जाने की न तो कोई समय सीमा है और विद्यालय में गुणवत्ता शिक्षा का माहौल है। कोई शिक्षक 11 बजे आते हैं तो कोई आकर हाजिरी बनाकर निजी काम करने घर चले जाते हैं। बिगत 3 मार्च को भी एक शिक्षक स्कूल में उपस्थिति बनाकर सड़क किनारे ट्रैक्टर से मिट्टी भराने में पूरे दिन लगे रहे। जब मन हुआ बिना सूचना के शिक्षक अनुपस्थित हो जाते हैं।

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इतना ही नही शिक्षा समिति की सचिव रीता देवी ने भी ग्रामीणों के आरोपों की पुष्टि करते हुए कहा कि विद्यालय में न तो कभी शिक्षा समिति की बैठक बुलाई जाती है न ही किसी समस्या में उनसे सलाह मशविरा ही लिया जाता है। शिक्षक मनमानी करते हैं। ग्रामीण इस बात को लेकर अड़े थे कि बीइओ या साधन सेवी खुद विद्यालय पर आकर अभिभावकों से बात करें और शेष बचे चावल उपलब्ध कराने का समय सीमा निर्धारित करें तब वितरण होने दिया जायेगा।

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बता दें कि कोरोना महामारी के मद्देनजर विभाग द्वारा एमडीएम के बदले बच्चों के बीच सूखा चावल वितरण किये जाने का निर्देश दिया गया था। विद्यालय के एचएम राम यतन राम ने बताया कि विद्यालय में कुल 146 बच्चें नामांकित हैं। विभागीय दिशा निर्देशानुसार सभी बच्चों के बीच 8 किलो चावल का वितरण करना था लेकिन एक किलो चावल भी उपलब्ध नही कराया गया। इस हिसाब से उक्त तीनों माह का 1168 किलो चावल विद्यालय को उपलब्ध होना था।

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अधिकारियों के निर्देश पर एमडीएम योजना का शेष बचा 205 किलो चावल का वितरण 2.4 किलो प्रति बच्चे की दर से 85 बच्चों के बीच किया गया। उसके अगस्त सितंबर माह का आवंटन 6 क्विंटल के बजाय महज 4 क्विंटल ही प्राप्त हुआ। जिसे प्रति बच्चों के बीच 4.8 किलो चावल 83 बच्चों के बीच किया गया। इसी तरह अक्टूबर नवंबर माह का आवंटन भी सिर्फ 4 क्विंटल हुआ है। सभी बच्चों के बीच 4.8 किलो चावल वितरण करने हेतु 6 क्विंटल चावल का आवंटन होना चाहिये था। अप्रैल माह से पहले डीबीटी के माध्यम से बच्चों के खाते पर राशि ही भेज दी गयी। लेकिन ग्रामीणों का कहना था कि किसी भी बच्चों के खाते पर राशि नही आयी और इसकी कोई खोज खबर शिक्षकों ने नही की न ही विभाग को अवगत कराया गया।

ग्रामीणों ने मोबाइल से एमडीएम के बीआरपी श्याम किशोर सिंह ने बात की तो उन्होंने कहा कि शिक्षक लेंगे तो देंगे क्यों नही। गौरतलब हो कि पास के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में भी 44 क्विंटल चावल का गबन इसी तरीके से कर लिया गया था, जो हो हंगामे के बाद दिया जा सका। ग्रामीणों को इसी बात से आशंका है कि इस विद्यालय का चावल भी गबन हो चुका है। एचएम ने कहा कि शेष बचे चावल आवंटित करने हेतु अधिकारियों से आग्रह किया गया है। आवंटन प्राप्त होते ही बच्चों के बीच वितरण कर दिया जायेगा।

मौके पर ग्रामीण अशोक यादव, शिवशंकर यादव, मोती यादव, बच्चूलाल यादव, रंजीत कुमार यादव, मन्नू यादव, बबन यादव, पवन यादव, सुधीर यादव, राजकुमार यादव, सुनील यादव, नरेश यादव व पूर्व मुखिया बलराम यादव सहित अन्य ग्रामीण भी मौजूद थे।

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