भूत बंगले जैसे बेहद जर्जर दो कमरों में दो शिक्षकों के भरोसे चल रहा विद्यालय

छत टूटकर गिरने का मंडरा रहा खतरा, भय के साये में हो रहा कक्षा का संचालन

विद्यालय परिसर में बने शेड में और बरामदे पर बच्चों को बैठाकर दी जा रही गुणवत्ता शिक्षा

बेनीपट्टी : बिहार में खस्ताहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा आम होते रहता है। इसी कड़ी में बेनीपट्टी प्रखंड के कई स्कूलों में संसाधनों का घोर अभाव देखने को मिल रहा है। कहीं सामुदायिक भवन में तो कहीं आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को बैठाकर गुणवत्ता शिक्षा देने की औपचारिकता पूरी की जा रही है।

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प्रखंड के नागदह गांव स्थित राजकीय प्राथमिक मकतब की भी स्थिति इन्ही में से एक है। जहां कई दशक पूर्व बने और बेहद जर्जर हो चुके भूत बंगले की शक्ल में तब्दील दो कमरों में दो शिक्षकों के सहारे कक्षा 1 से पांच तक के नामांकित कुल 171 बच्चों को बैठाकर कक्षा संचालन किया जा रहा है।

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विद्यालय की बदहाली का आलम यह है कि विद्यालय में न तो किचेन शेड है न ही एक भी शौचालय है। बच्चों को खुले में शौच करने की विवशता बनी है। जगह और कमरों के अभाव में विद्यालय परिसर के ठीक बीच में एस्बेस्टस रखकर एक शेड का निर्माण कराया गया है, वह भी जर्जरता का शिकार हो चुका है। सभी बच्चों की उपस्थिति होने पर विद्यालय परिसर में पैर रखने की जगह नही बचती। शेड और बरामदे में येन केन प्रकारेण बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता है।

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जो दो कमरे हैं उसकी भी दीवारें जगह-जगह पर फट चुकी है और मोटी-मोती स्पष्ठ दरारें देखी जा सकती है। छत की स्थिति ऐसी है कि पूरा प्लास्टर झड़ कर गिर चुका है और लोहे की रॉड दिख रही है। कुल मिलाकर स्थिति ऐसी है कि कभी भी कमरे का छत गिर सकता है और बड़ा हादसे होने का खतरा बना रहता है। एचएम विद्यालय के सभी पंजी और कागजात को रोज झोले में रखकर घर ले जाते हैं और लाते हैं। कमरे के अभाव में एक ही कमरा में एमडीएम संचालन और कक्षा संचालन दोनों करना पड़ता है। बरामदे के एक कोने में टेबल कुर्सी लगाकर कार्यालय संचालन किया जाता है। एचएम मो. नसीर ने बताया कि भय के साये में कक्षा संचालन करने की मज़बूरी है। भवन की जर्जरता से संबंधित समस्या को लेकर कई बार वरीय अधिकारियों को आवेदन देकर अवगत कराया जा चुका है।

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जमीन उपलब्धता को लेकर स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा 4 अप्रैल 2018 को बेनीपट्टी सीओ को आवेदन देकर अनापत्ति प्रमाण पत्र देने की मांग की जा चुकी है। जिस पर अब तक अमल नही किया जा सका। उन्होंने यह भी बताया कि वित्तीय वर्ष 2012-13 में शौचालय निर्माण के लिये राशि आयी थी लेकिन ग्रामीणों ने पास में कब्रिस्तान होने का हवाला देकर निर्माण रोक दिया गया. जिससे राशि वापस लौट गयी। इस बाबत बीइओ अरविंद कुमार ने कहा कि जल्द ही समस्या का समाधान कराया जायेगा।

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