फुलहर पुष्पवाटिका में भगवान के डोले के साथ हुआ फूललोढ़ी

फुललोढ़ी में भाग लेने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

गिरजा महारानी का दर्शन करने उमड़े भक्त

हरलाखी : ऐतिहासिक 15 दिवसीय मिथिला मध्यमा परिक्रमा दूसरे पड़ाव में कल्याणेश्वर के बाद फुलहर पहुंचा। सोमवार को फुलहर के फुलवारी बाग तराग में फूललोढ़ी रस्म हुआ। जहां मिथिला बिहारी व किशोरी जी के डोला को गिरजा महारानी दर्शन के बाद बगतराग ले जाकर फूललोढ़ी हुआ। विदित हो कि फुलहर स्थित बगतराग पौराणिक धरोहर है।

फुललोढ़ी को जाते मिथिला बिहारी का डोला

मान्यता है कि बगतराग के बाग में रामायणकाल में माता जानकी फूल लोढ़ने आया करती थी। इसी स्थल पर जनकपुर जाने के क्रम में मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम व माता जानकी का पहला मिलन हुआ था। जो धर्मग्रंथ रामायण में भी वर्णित है। इस पौराणिक स्थल पर परिक्रमा यात्रा एक सुखद अनुभूति कराता है।

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सुरक्षा में पुलिस बल व चौकीदारों की प्रतिनियुक्ति

परिक्रमा मेला में सुरक्षा व विधि व्यवस्था को लेकर काफी संख्या में चौकीदार व महिला पुलिस के साथ जवानों की तैनाती की गई थी। हरलाखी थाना के अलावे खिरहर व साहरघाट पुलिस जवान एवं पदाधिकारी लगातार गश्त कर सुरक्षा व्यवस्था को मुक्कमल कराने को प्रतिबद्ध दिखे। थानाध्यक्ष प्रेमलाल पासवान ने बताया कि कई थानों के चौकीदार, बल व पदाधिकारियों के अलावे जिला से अतिरिक्त पुलिस बल को लगाया गया है। खासकर चोर व उच्चकों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। हर एक गतिविधियों पर हमारी पैनी नजर बनी हुई है।

सुरक्षा में तैनात पुलिस बल व चौकीदार

अयोध्या व वृंदावन समेत भारत नेपाल के हजारों साधु संतों ने लिया हिस्सा

मिथिला का 84 कोस से विख्यात मध्यमा परिक्रमा यात्रा में भारत नेपाल के साधु संतों ने हिस्सा लिया। खासकर अयोध्या, वृंदावन, उत्तराखंड, राजस्थान, बंगाल समेत दोनों देश के हजारों साधु संत व श्रद्धालुओं की उपस्थिति मनमोहक रहा। जानकारी देते हुए रामजानकी मंदिर कलना के महंथ बाबा रामभूषण दास निर्मोही ने कहा कि 84 लाख योनियों के बाद मनुष्य का जीवन मिलता है। इस परिक्रमा यात्रा का खास महत्व है।

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फुलहर माता सीता की धरती है। इस यात्रा में शामिल होने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मेले में लाखों लोगों की भीड़ होती है। इसलिए इस मेले को सरकारी स्तर पर महोत्सव का रूप देना चाहिए। ताकि मिथिला की इस पावन यात्रा को विश्व स्तर पर पहचान मिल सके।

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