अंतराष्ट्रीय नियमों पर भारी पड़ा लोगों आस्था, उमड़ा जनसैलाव

भारत नेपाल सीमा सील होने के बावजूद सैकड़ो गाड़ियां व हजारों लोग भाग लिए 15 दिवसीय मध्यमा परिक्रमा में

हरलाखी : वैश्विक महामारी कोरोना काल के दौरान सम्पूर्ण लॉक डाउन के वजह भारत नेपाल सीमा को सील कर आवागमन पर पूर्ण पाबंदी लगा दिया गया। जो अब तक लागू है। भारत नेपाल में प्रवेश को लेकर पूर्णतः पाबंदी रखी गई है। लेकिन यह पाबंदी लोगों की आस्था व सम्बंध को नही रोक पाया।

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बताते चले कि हर साल की तरह इस साल भी भारत नेपाल का ऐतिहासिक मध्यमा 15 दिवसीय परिक्रमा यात्रा लाखों श्रद्धालुओं के जत्था के साथ बॉर्डर पार कर इसमे शामिल हुए। परिक्रमा रुट से ही दोनों देश के लाखों लोग बैलगाड़ी, ट्रेक्टर, रिक्शा, टेम्पो, बाइक अथवा विभिन्न साधनों से हरने सीमा से होते हुए कल्याणेश्वर पहुंचा। चर्चा यह भी था कि बॉर्डर सील होने की वजह से इस यात्रा पर असर पड़ेगा। लेकिन लाखों लोगों की भीड़ सरकार अथवा अंतरराष्ट्रीय नियमों पर भारी पड़ा। जबकि बॉर्डर पर भारत की ओर से एसएसबी जवान व नेपाल की ओर से इपीएफ अथवा नेपाली पुलिस नियमित रूप से तैनात थी।

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लेकिन यात्रियों का जत्था लगातार भारत मे प्रवेश कर दोनों देश के सम्बंध की इतिहास को दोहराता रहा। किशोरी जी के डोला का नेतृत्व कर रहे नवल किशोर शरण, हरलाखी मुखिया दयानन्द झा, मोहन झा, बौअन झा, गोपाल झा समेत लोगों ने बताया कि मिथिला की संस्कृति और इसकी विरासत अद्भुत है। भारत नेपाल का दो देश होने से यह नियम है, लेकिन हम मिथिलावासी है। सबसे पहले मिथिला की बेटी जनकनंदनी जानकी है। जिसका आस्था सब पर भारी है।

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भारत नेपाल का संबंध राजनीतिक स्तर पर खराब हुआ है। हमारा सम्बंध बेटी और रोटी का है। जो कभी खत्म नही हो सकता है।

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