BENIPATTI : उच्चैठ में अतिक्रमण खाली कराने पहुंची पुलिस पर ग्रामीणों ने किया पथराव

एसएचओ सहित आधे दर्जन पुलिस कर्मी घायल

आक्रोशित लोगों ने घंटों किया सड़क जाम

बेनीपट्टी : प्रखंड के उच्चैठ में शुक्रवार को उच्च न्यायालय व जिला दंडाधिकारी के आदेश पर अतिक्रमित सार्वजनिक जमीन को खाली कराने पहुंची पुलिस को अतिक्रमणकारियों के भारी विरोध और पथराव का सामना करना पड़ा. लोगों के जबरदस्त विरोध और अंधाधुंध रोड़ेबाजी के कारण प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस जवानों को अतिक्रमण खाली कराने का काम कुछ देर के लिये रोकना पड़ा.

मिली जानकारी के अनुसार सीओ पल्लवी कुमारी गुप्ता, बेनीपट्टी एसएचओ रवींद्र प्रसाद व थाना पुलिस के अधिकारी व कर्मियों सहित मधुबनी से काफी संख्या में पहुंचे पुलिस के जवान उच्चैठ थुम्हानी नदी स्थित पुल के समीप उक्त आदेश पर पहुंचे थे, जहां दस डिसमिल सार्वजनिक जमीन पर बनायी गयी मछली हाट के समीप पान व अन्य दुकानों व घरों को हटाकर अतिक्रमणमुक्त कराना था. इस दौरान प्रशासन के द्वारा एक दुकान का जाफरी व खूंटा हटाते ही अन्य तीन अतिक्रमणकारी व स्थानीय लोगों के द्वारा भारी विरोध किया जाने लगा और कई पुलिस बलों व अधिकारियों के साथ नोकझोंक होने लगी और देखते ही देखते स्थानीय लोगों ने पुलिस बलों पर गाली गलौज और पथराव शरू कर दिये.

सैंकड़ों की संख्या में मौजूद महिला पुरुष, युवा व बच्चों के द्वारा अंधाधुंध रोड़ेबाजी शुरू कर दी गयी, जो करीब आधे घंटे तक जारी रही. इस क्रम में आक्रोशित लोगों ने जेसीबी मशीन के शीशे चकनाचूर कर दिये. रोड़ेबाजी शुरू होते ही पुलिस कर्मी पीछे की ओर भागने लगी. इसी क्रम में एसएचओ रवींद्र प्रसाद सहित आधे दर्जन पुलिस घायल हो गये. किसी के सिर पर तो किसी के गर्दन, पैर व हाथ पर रोड़े लगे. हालांकि खबर भेजे जाने तक किसी घायल थाना पुलिस को किसी अस्पताल में भर्ती होने की सूचना नही मिल सकी थी. उधर ग्रामीणों के तेबर देख पुलिस के अपने पांव पीछे करने पड़े. इसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने पूल के समीप मुख्य सड़क को जाम कर आवाजाही ठप कर दिया. इसके बाद घटना की सूचना एसडीएम को दी गयी.

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सूचना मिलते ही एसडीएम अशोक कुमार मंडल घटना स्थल पर पहुंच वार्ता में जुट गये. घटना तकरीबन तीन बजे के आस-पास की है. लिहाजा लोगों के भारी विरोध को देखते हुए अतिक्रमणमुक्त के कार्य को कुछ देर के लिये रोक देना पड़ा. मिली जानकारी के अनुसार, बेनीपट्टी थाना क्षेत्र के धनौजा गांव के प्रदीप मिश्र के द्वारा उच्च न्यायालय में परिवाद दायर कर जीतेंद्र मुखिया, रामचंद्र मुखिया, शिवनंदन मुखिया व कामेश्वर मुखिया के खिलाफ जिला परिषद की सरकारी सार्वजनिक जमीन को अतिक्रमण कर रखने का आरोप लगाया गया है. जिसके आलोक में उच्च न्यायालय द्वारा अतिक्रमणकारियों की गिरफ्त से उक्त अतिक्रमित जमीन को मुक्त कराने का आदेश पारित किया गया था. सीओ ने बताया कि इससे पहले भी अतिक्रमणकारियों को जमीन खाली करने के लिये नोटिस भेजा जा चुका है.

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इधर, अतिक्रमणकारियों ने अंचल प्रशासन पर आपसी मिलीभगत कर सिर्फ उन चार पांच लोगों पर ही ज्यादती करने और बिना सूचना दिये जबरदस्ती करने का आरोप लगाया है. गौरतलब हो 13 मार्च 2020 को भी लोक शिकायत निवारण कार्यालय के निर्देश पर अतिक्रमण खाली कराने पहुंची थाना पुलिस को लोगों के भारी विरोध के कारण बिना अतिक्रमण खाली कराये बेरंग वापस लौटना पड़ा था. खबर भेजे जाने तक पुलिस बलों और अतिक्रमण कारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई थी. वहीं रोड़ेबाजी के बाद प्रशासन ने साहरघाट, खिरहर और अरेर थाना व अन्य पुलिस को भी मौके पर बुला लिया था, जो कैम्प कर रही थी.

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