BENIPATTI गोलीकांड : हत्या के चौथे दिन भी महमदपुर में छायी रही बिरानगी

  • सभी घरों के गेट और खिड़कियां बंद
  • गांव से लेकर चौक चौराहे तक व्याप्त है सन्नाटा
  • कम नही हुआ है दहशत का माहौल
  • घायल छह में पांच की मौत की मिल रही सूचना
  • प्रशासन ने चार चार घायलों के मौत की ही कर रही पुष्टि
  • एक ही परिवार के आस-पास से इतने लोगों की हत्या से गांव में पसरा है मातम

बेनीपट्टी : स्थानीय थाना के महमदपुर गांव में होली के दिन सोमवार को पूर्व के मछली मारने के विवाद में हुए गोलीकांड में घायल छह लोगों में चार की मौत की आधिकारिक पुष्टि कर दी गयी है.। चौथे मृतक अमरेंद्र सिंह का शव गांव पहुंचने के बाद बुधवार को उनका अंतिम दाह संस्कार कर दिया गया। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पांचवे घायल की भी मौत हो चुकी है लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक महज मौत की ही पुष्टि की जा रही है। अब तक आधिकारिक पुष्टि के अनुसार मृतकों में बीएसएफ जवान राणा प्रताप सिंह, वीरेंद्र सिंह उर्फ बीरू, रणविजय सिंह और अमरेंद्र कुमार सिंह शामिल हैं। वहीं एक अन्य घायल की भी पटना में मौत हो जाने की अपुष्ट खबर मिल रही है. बता दें कि दो घायलों में शामिल रुद्र नारायण सिंह का पटना में और मनोज कुमार सिंह का इलाज दरभंगा में चल रहा था।

बताया जा रहा है कि घायल शिक्षक मनोज कुमार सिंह के गले में गोली फंसी है। स्थिति बेहद नाजूक और फिलहाल स्थिर बनी हुई है। भेंटीलेटर पर उन्हें रखा गया है। चारों मृतकों के शव को उनके पैतृक गांव में संस्कार कर दिया गया है। इधर, एक ही परिवार के इतने लोगों की हत्या से गांव में दहशत का माहौल कायम है. गांव में मातम पसरा हुआ है। सभी घरों की खिड़कियां बंद पड़ी है। गांव के अलावे चौक चौराहे पर भी गोलीकांड के तीसरे दिन सन्नाटा छाया हुआ है। एक भी लोग वाहन या पांव पैदल आवाजाही करते हुए नही दिख रहे हैं। गोलीकांड के बाद आलम यह है कि गांव में विरानगीं तो छायी हुई है ही, इधर महमदपुर चौक की दुकानें भी बंद देखी जा रही है। अब भी तनाव की स्थिति दबे जुबान स्थानीय के द्वारा कही जा रही है। दहशत का आलम ऐसा है कि पत्ता खड़खड़ाने पर भी लोगों को डर सताने लगता है।

महमदपुर चौक पर चाय दुकान करनेवाले एक दुकानदार ने कहा कि “सर यौ एखन हम सभ एते भयभीत छि कि छोट छीन आवाज होयला पर रोआं कापै लागैय। बीतल मंगलक रात डरावना गुजरल। हवा के झोंका से राति भर खड़खड़ाहट के आवाज स भरि राति भयक साये में गुजरलौन. राति भरि में पचासों बेर फुरफुराक उठ बैसल होयब.’ कई लोगों ने बताया कि गांव की ओर कोई भी एंबुलेंस वाहन आता दिखता है तो शक होने लगता है कि किसी और घायल की भी मौत तो नही हो गयी। अगर ऐसा हुआ तो आक्रोश दबाना मुश्किल हो सकता है और प्रतिकार में फिर कोई अनहोनी घटना न हो जाये। हालांकि पुलिस गांव में कैंप और पेट्रोलिंग कर माहौल शांत करने में जुटी हुई है।

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