बेनीपट्टी में बैंकों के निजीकरण के खिलाफ बैंक कर्मियों के दो दिवसीय हड़ताल से बढ़ी परेशानी

उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी लेकिन उपभोक्ताओं ने कहा जनहित में है हड़ताल

बेनीपट्टी में बंद पड़ा एसबीआइ बैंक शाखा

बेनीपट्टी : प्रखंड मुख्यालय में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर बैंकों की निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मियों के हड़ताल पर जाने के कारण अधिकांश बैंक शाखाओं में ताला लटका रहा. मुख्यालय के एसबीआइ, पीएनबी, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और बनकट्टा स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा सहित प्रखंड के अधिकांश बैंक शाखाएं बंद रही. जिससे दिन भर दूर दराज से आये उपभोक्ता परेशान रहे. वे कभी बैंक शाखा तो कभी एटीएम का चक्कर लगाते रहे.

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कई लोगों ने बताया कि बैंकों के नही खुलने से हमारी परेशानी बढ़ गयी. अब कोई अन्य विकल्प के माध्यम से रुपयों का व्यवस्था करना होगा. वहीं कुछ लोग दूसरे प्रदेशों में पढ़ रहे अपने बच्चों को पैसा भेजने के लिये बैंक शाखा पहुंचे थे, जिन्हें शाखा बंद रहने से निराशा हाथ लगी. वहीं जब लोगों ने यह जाना की सरकार बैंकों को निजीकरण करने की फिराक में है और इसके विरोध में ही बैंककर्मी दो दिवसीय हड़ताल पर चले गये हैं. तब लोगों ने कहा कि बैंक कर्मियों का हड़ताल और आंदोलन जायज है और जनहित में उठाया गया कदम है. इसके लिये तमाम जनप्रतिनिधियों सहित आमजनों को भी पहल करनी चाहिये. ताकि यह आवाज मजबूती से सरकार तक पहुंच सके.

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कई लोगों ने बताया कि आज स्कूल और अस्पतालों को निजीकरण का दंश देश की जनता भुगत रही है. दवा और शिक्षा की हालत से सभी लोग परिचित हैं. सरकार जनता की जिंदगी भर की कमाई को लूटकर मेहुल चौकसी, नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोगों के हाथों बेचने की साजिश की जा रही है. अब अगर बैंकों को भी बेच दिये गये तो भगवान ही मालिक होंगे. इसके लिये सबको एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत है. इसलिए बैंक कर्मियों ने सरकारी बैंक बचाओ देश बचाओ नारे के साथ जो हड़ताल कर निजीकरण के विरोध का बिगुल फूंकने का काम किया है उसे मजबूत करने की जरूरत है.

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