जनकपुरधाम पहुंचकर अन्तरगृह परिक्रमा के बाद पूरा होगा मिथिला मध्यमा परिक्रमा

विशोल विश्वामित्र आश्रम में साधु संतों के लिए महाभण्डारा का आयोजन

विक्रम भगत नागवंशी की रिपोर्ट
हरलाखी :
ऐतिहासिक 15 दिवसीय मिथिला मध्यमा परिक्रमा अब अंतिम चरण में है। शुक्रवार को परिक्रमा यात्रा साधु संत व श्रद्धालुओं के साथ विशोल विश्वामित्र आश्रम पहुंचा। जहां महंथ बृज भूषण दास के नेतृत्व में ग्रामीणों ने मिथिला बिहारी व किशोरी जी के डोला का भव्य स्वागत किया। डोला का दर्शन करने के लिए आसपास के इलाके से भारी भीड़ जुट गई। इस दौरान भव्य मेला का भी आयोजन किया गया था।

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बताते चले कि 14 मार्च से कल्याणेश्वर से शुरू यह 15 दिवसीय मध्यमा परिक्रमा शुरू होकर गिरजा महारानी स्थान फुलहर, मटिहानी, जलेश्वर, मड़ई, ध्रुव कुंड, कंचन्वन, पर्वता, धनुषा, सतोखर, औरही, करुणा, विशोल व कल्याणेश्वर परिक्रमा पूरा करने के बाद विशोल विश्राम के बाद 27 मार्च को को जनकपुरधाम गंगासागर पर वृहत जनकपुर क्षेत्र विकास परिषद द्वारा बनवाया मंडप में रात्रि विश्राम के बाद 28 मार्च को अन्तरगृह परिक्रमा से 15 दिवसीय मध्यमा परिक्रमा पूर्ण हो जाएगा।

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विशोल विश्वामित्र स्थान में महंथ ब्रजमोहन दास के नेतृत्व में ग्रामीणों के सहयोग से महाभण्डारा का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों साधु संत व श्रद्धालुओ ने प्रसाद ग्रहण किया। जानकारी देते हुए महंथ श्री दास ने कहा यह भारत नेपाल के सम्बंध को दर्शाता ऐतिहासिक यात्रा है। इस यात्रा में भाग लेने से मनुष्य जीवन मे मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मेले को सरकारी स्तर पर प्रबंधन करने की जरूरत है। केंद्र व राज्य सरकार के पास इसका प्रस्ताव भेजा गया है। लेकिन सरकार एक दूसरे पर फेंक कर मिथिला की इस धरोहर की उपेक्षा करते है।

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वही जदयू नेता रणवीर सिंह, भाजपा नेता विकास कुमार पासवान, रामस्नेही महतो, मुखिया मदन राम समेत लोगो ने कहा यह हमारा पौराणिक धरोहर है। जिसके संरक्षण के लिए सरकार से मांग करेंगे कि इसे सरकारी स्तर पर सोनपुर मेले की तरह आयोजन करें। क्योंकि इस मेले में भारत नेपाल के लाखों लोग भाग लेते है।

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